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Friday, October 16, 2009

एक और दर्द - हिन्दी
मधुरा मनोहरा पुनीता है हिन्दी
शैशव की गीता संगीता है हिन्दी
हिन्दी है माटी की प्राकट्य प्रतिबिम्ब
देव भूमि संस्कृति की परिणीता है हिन्दी

सुनती है भारत वसुंधरा की धड़कन
सुख दुःख की अंतःकरण की है भाषा
आशा है राष्ट्र- उत्थान के कंटक पथ की
सजग सत्य पथ की अभिलाषा है हिन्दी

हिन्दी जो माता - सहोदर- सहपाठी है
सहचरी है पगपग पर प्रेरक हमारी
हमारी मुंह बोली सहेली अलबेली
अपने ही घर में परित्यक्ता - अकेली है
अंग्रेजी हरजाई के मद में सब डूबे है
हिंगलिश की घुटनों में सिसकती है हिन्दी
....... अरुण
(१२ सितम्बर २००५)

हिंदी दिवस के लिए 

Monday, June 15, 2009

दर्द
आरक्षण के डोर में फंसा समूचा तंत्र
औ बीच बीच में डांक के नेता फूकें मंत्र
नेता फूंकें मंत्र भले जनता चिल्लाये
जाति में बंट गए लोग देस भक्खद में जाए
कहै अरुण घबराय त्राहि त्राहि है हर क्षण
कुछ करो नहीं तो प्राण सोख लेगा आरक्षण ।
..................... अरुण
( १३ सितम्बर २००१)