Tuesday, March 22, 2011

गर्दभ ज्ञान

 साधू स्वभाव ! कितना सीधा !!
अद्भुत सरलता का मिसाल !!!
सर्वस्व सहन कर चुप रहते 
शान्ति तुम्हारी बेमिसाल 
सचमुच कहता हूँ  गधे राज तुमसा नहीं देखा ..

हो मूक ..थूक  गुस्से को 
तुम चलते हो बोझ को लेकर के 
सारे अधिकार नियंत्रण का 
स्वामी को अपने देकर के 
तुम झूम के चलते दुलकी चाल 
सचमुच कहता हूँ  गधे राज तुमसा नहीं देखा ..

जब कभी दुलत्ती देते हो 
तब लगते साहस के प्रतीक
दुनिया से अलग अनोखी ही 
किस अदा से करते तुम कवित्त 
संगीत तुम्हारी बेमिसाल 
सचमुच कहता हूँ  गधे राज तुमसा नहीं देखा ..

शांतिदूत नेहरु जी को ही 
बस वही लोग ही कहते है 
सर्वथा अपिरिचित तुमसे 
या तुमसे जो ईर्ष्या रखते हैं 
मिलना चहिये तुम्हे अबकी बार 
शान्ति का नोबेल पुरस्कार
सचमुच कहता हूँ  गधे राज तुमसा नहीं देखा ..
.
.......................अरुण 
.( some time in 1982)

2 comments:

  1. शांतिदूत नेहरु जी को ही
    बस वही लोग ही कहते है
    सर्वथा अपिरिचित तुमसे
    या तुमसे जो ईर्ष्या रखते हैं
    मिलना चहिये तुम्हे अबकी बार
    शान्ति का नोबेल पुरस्कार
    सचमुच कहता हूँ गधे राज तुमसा नहीं देखा ..
    कटाक्ष करने में सफल रचना |

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  2. धन्यवाद मीनाक्षी जी.

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